: दिल्ली वालों‚ दिल पर मत लेना!,(व्यंग्य : राजेन्द्र शर्मा)
Sun, Aug 6, 2023
दिल्ली वालों, बस दिल पर मत लेना! अधिकार–वधिकार छीनने–छिनने की बात‚ तो वैसे भी इंडिया वालों की झूठी अफवाह है। माना कि शाह जी दिल्ली के लिए फिर एक नया कानून ले आए हैं और ले आए हैं, तो उसे पास भी करा के ही मानेंगे। पर वो अधिकार–वधिकार किसी के नहीं छीन रहे हैं। दिल्ली वालों के पास तो वैसे भी आठ–नौ साल में तो कभी ऐसे कोई अधिकार वगैरह थे ही नहीं। नहीं मानो तो केजरीवाल जी से ही पूछ लो। तो जो अधिकार थे ही नहीं‚ उन्हें कोई छीन कैसे सकता हैॽ अधिकार भी‚ उनका छिनना भी‚ दिल्ली वालों के हिस्से में अब तक जो भी आया है‚ सब माया है!अब माया तो आप जानो कि ठहरी ही ठगनी। दिल्ली की पब्लिक को ठग लिया। चुनाव को चुनाव समझ बैठी तो समझ बैठी‚ चुनाव से बनी सरकार को‚ सरकार भी समझ बैठी। सरकार को सरकार समझने से बात‚ सरकार के अधिकारों तक पहुंच गयी। आखिरकार‚ बेचारे मोदी जी को ही दिल्ली वालों को चपत लगाकर इस झूठे सपने से जगाना पड़ा। बताना पड़ा कि सरकार जी तो एक ही हैं –– हम। और हमारे बाद‚ हमारा लघु रूप –– लाट गवर्नर। हमारा राज ही सत्य है‚ बाकी सब मिथ्या है। पर माया पर किसने यूं ही पार पाया हैॽ सर्वोच्च अदालत वाले झांसे में आ गए। कहने लगे चुनाव तो चुनाव है‚ सरकार तो सरकार है। अंगरेजों के टैम हुआ तो हुआ‚ लाट गवर्नर अब सरकार नहीं हो सकता। शाह जी को तब भी दिल्ली के लिए स्पेशल कानून बनाना पड़ा था। पर दिल्ली की पब्लिक माया से चिपटी रही। फिर चुनाव कराया‚ फिर वही नतीजा‚ फिर वही सरकार। फिर वही माया की ठगाई में आई सर्वोच्च अदालत। बेचारे शाह साहब फिर से दिल्ली के लिए स्पेशल कानून ला रहे हैं। और मायावी फिर से अधिकार छीन लिए‚ झपट लिए का शोर मचा रहे हैं!पर शाह जी भी कब तक नये–नये कानून लाएंगेॽ क्यों नहीं दिल्ली के चुनाव का नाम बदलकर सुझाव कर दिया जाए और सरकार का नाम बदलकर‚ विद्वत परिषद। संस्कृति की संस्कृति और कानूनी किटकिट से मुक्ति भी। बल्कि चुनाव‚ सरकार‚ अधिकार की ऐसी माया से मुक्ति तो इस कर्तव्य काल में पूरे देश को ही मिल जानी चाहिए। चुनाव‚ संविधान‚ अधिकार‚ सब की माया पर भारी –– तीसरी पारी!(व्यंग्यकार वरिष्ठ पत्रकार और साप्ताहिक 'लोकलहर' के संपादक हैं।)
: महिला सशक्तिकरण प्रयासों से महिलाओं में आशा और आत्मविश्वास होगा पैदा - पीएम मोदी
Thu, Aug 3, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण विकास को गति देता है और शिक्षा तक उनकी पहुंच वैश्विक प्रगति आगे बढ़ाती है। उन्हें सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी तरीका महिला नेतृत्व वाला विकास दृष्टिकोण है। भारत इस दिशा में प्रगति कर रहा है। उनकी आवाज सकारात्मक बदलाव के लिये प्रेरित करती है। अगर आप महिलाओं का विकास करना चाहते हैं तो आपको उनके नेतृत्व में ही विकास करना होगा।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात की राजधानी गांधीनगर के महात्मा मंदिर में महिला सशक्तिकरण पर आयोजित जी -20 मंत्रिस्तरीय सम्मेलन को वर्चुअल संबोधित करते हुये कही। प्रधानमंत्री ने उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुये महात्मा गांधी के नाम पर रखे गये गांधीनगर शहर के स्थापना दिवस पर गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और प्रसन्नता व्यक्त की कि उन्हें अहमदाबाद में गांधी आश्रम का दौरा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसे मुद्दों के लिये तत्काल और दीर्घकालीन समाधान खोजने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुये उन्होंने कहा कि गांधी आश्रम में गांधीजी की जीवन शैली की सादगी और स्थिरता , आत्मनिर्भरता और समानता के उनके दूरदर्शी विचारों को प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गणमान्य व्यक्तियों को इससे प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने दांडी कुटीर संग्रहालय का दौरा करने का भी उल्लेख किया और बताया कि गांधीजी का प्रसिद्ध चरखा पास के एक गांव में गंगाबेन नाम की एक महिला को मिला था। प्रधानमंत्री ने कहा कि तब से गांधीजी ने खादी पहनना शुरू कर दिया जो आत्मनिर्भरता और निर्वहनीयता का प्रतीक बन गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महिला सशक्तिकरण की आदर्श उदाहरण हैं। वे एक साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि से आती हैं , लेकिन अब दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करती हैं और दुनियां की दूसरी सबसे बड़ी सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्य करती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की इस जननी में 'मतदान का अधिकार' शुरू से ही भारतीय संविधान में महिलाओं सहित सभी नागरिकों को समान रूप से प्रदान किया गया था और समानता के आधार पर चुनाव लड़ने का अधिकार भी दिया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि आर्थिक , पर्यावरणीय और सामाजिक परिवर्तन की प्रमुख कारक रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत में ग्रामीण स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों में छियालीस प्रतिशत महिलायें हैं , जिनकी संख्या 1.4 मिलियन है। यह रेखांकित करते हुये कि स्व-सहायता समूहों में महिलाओं को प्रेरित करना भी बदलाव के लिये एक शक्तिशाली कारक रहा है। प्रधानमंत्री ने महामारी के दौरान हमारे समुदायों के लिये स्वयं सहायता समूहों और निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के सहायता के स्तंभ के रूप में उभरने पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने उनकी उपलब्धियों का उदाहरण दिया और मास्क और सैनिटाइजर के निर्माण और संक्रमण की रोकथाम के बारे में जागरूकता पैदा करने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा - भारत में अस्सी प्रतिशत से अधिक नर्स और दाईयां महिलायें हैं। महामारी के दौरान वे हमारी रक्षा की अग्रिम पंक्ति थीं और हमें उनकी उपलब्धियों पर गर्व है। यह रेखांकित करते हुये कि महिला-केंद्रित विकास सरकार के लिये एक प्रमुख प्राथमिकता रही है , प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत सूक्ष्म स्तर की इकाइयों की सहायता करने के लिये एक मिलियन रुपये तक के लगभग सत्तर प्रतिशत ऋण महिलाओं को मंजूर किये गये हैं। इसी तरह स्टैंड-अप इंडिया के तहत अस्सी प्रतिशत लाभार्थी महिलायें हैं , जो ग्रीन फील्ड परियोजनाओं के लिये बैंक ऋण का लाभ उठा रही हैं। यह देखते हुये कि स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन पर्यावरण को सीधे प्रभावित करता है और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाता है , पीएम ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर प्रकाश डाला और बताया कि ग्रामीण महिलाओं को लगभग 100 मिलियन रसोई गैस कनेक्शन प्रदान किये गये हैं। उन्होंने यह भी बताया कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की संख्या 2014 से दोगुनी हो गई है , भारत में एसटीईएम (विज्ञान , प्रौद्योगिकी , इंजीनियरिंग और गणित) स्नातकों में लगभग तिरालीस प्रतिशत महिलायें हैं और भारत में लगभग एक-चौथाई अंतरिक्ष वैज्ञानिक महिलायें हैं। उन्होंने कहा - चंद्रयान , गगनयान और मिशन मंगल जैसे हमारे प्रमुख कार्यक्रमों की सफलता के पीछे इन महिला वैज्ञानिकों की प्रतिभा और कड़ी मेहनत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में पुरुषों की तुलना में महिलायें उच्च शिक्षा में अधिक प्रवेश ले रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में नागरिक उड्डयन में महिला पायलटों का प्रतिशत सबसे अधिक है , जबकि भारतीय वायु सेना में महिला पायलट भी लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं। पीएम ने कहा कि हमारे सभी सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को प्रचालनगत भूमिकाओं और लड़ाकू मोर्चो पर तैनात किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीण कृषि परिवारों की रीढ़ के रूप में और छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के रूप में महिलाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिकाओं को रेखांकित किया। प्रकृति के साथ उनके घनिष्ठ संबंध को रेखांकित करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलायें जलवायु परिवर्तन के के नवोन्मेषी समाधानों की कुंजी हैं। उन्होंने स्मरण किया कि किस प्रकार महिलाओं ने अठारहवीं शताब्दी में भारत में पहली प्रमुख जलवायु कार्यवाही का नेतृत्व किया जब अमृता देवी के नेतृत्व में राजस्थान के बिश्नोई समुदाय ने अंधाधुंध कटाई को रोकने के लिये 'चिपको आंदोलन' शुरू किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने कई अन्य ग्रामीणों के साथ प्रकृति के ध्येय के लिये अपना जीवन अर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा - भारत में महिलायें ‘’मिशन लाईफ' - पर्यावरण के लिये जीवन शैली’’ की ब्रांड एंबेसडर भी रही हैं , साथ ही उन्होंने कम करने , पुन: उपयोग करनेक्ष, रिसाइकिल करने और पुन: प्रयोजन के उनके पारंपरिक ज्ञान को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विभिन्न पहलों के तहत महिलायें सक्रिय रूप से सौर पैनल और लाइट बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने 'सोलर मैमास' पहल का उल्लेख किया जो विकासशील देशों में साझेदार देशों के साथ सहयोग करने में सफल रही है। प्रधानमंत्री ने भारत में महिला उद्यमियों की भूमिका पर जोर देते हुये कहा कि महिला उद्यमियों का वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि दशकों पहले 1959 में मुंबई में सात गुजराती महिलाओं ने मिलकर एक ऐतिहासिक सहकारी आंदोलन श्री महिला गृह उद्योग का सृजन किया था , जिसने लाखों महिलाओं और उनके परिवारों के जीवन को रूपांतरित कर दिया है। पीएम ने उनके सबसे प्रसिद्ध उत्पाद लिज्जत पापड़ का उल्लेख करते हुये कहा कि यह शायद गुजरात में खाद्य मेनू में शामिल होगा। उन्होंने डेयरी क्षेत्र का भी उदाहरण दिया और बताया कि अकेले गुजरात में इस क्षेत्र से 3.6 मिलियन महिलायें जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लगभग 15 प्रतिशत यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला संस्थापक है और महिलाओं के नेतृत्व वाली इन यूनिकॉर्न कंपनियों का संयुक्त मूल्य चालीस अरब डॉलर से अधिक है। प्रधानमंत्री ने एक ऐसा स्तरीय मंच का निर्माण करने की आवश्यकता पर बल दिया जहां उपलब्धियां हासिल करने वाली महिलायें आदर्श बन सकें। उन्होंने उन बाधाओं को दूर करने की दिशा में काम करने पर जोर दिया जो बाजारों , वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं और निम्न लागत वित्त तक उनकी पहुंच को प्रतिबंधित करते हैं , साथ ही यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि देखभाल और घरेलू काम के बोझ को भी इसी के साथ-साथ उपयुक्त तरीके से दूर किया जाये। अपने संबोधन का समापन करते हुये प्रधानमंत्री ने महिलाओं की उद्यमिता , नेतृत्व और शिक्षा पर मंत्रालयी सम्मेलन के फोकस की सराहना की और महिलाओं के लिये डिजिटल और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिये 'टेक-इक्विटी प्लेटफॉर्म' के लॉन्च पर प्रसन्नता जताई की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत की जी-20 अध्यक्षता के तहत 'महिला सशक्तिकरण' पर एक नया कार्य समूह स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गांधीनगर में अथक प्रयासों से विश्व भर की महिलाओं में असीम आशा और आत्मविश्वास पैदा होगा।
: पीएम मोदी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक
Fri, Jul 21, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनई दिल्ली - श्रीलंका में जारी आर्थिक संकट के बीच पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार अपने दो दिवसीय भारत यात्रा के दूसरे दिन श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने आज पीएम मोदी से मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी के हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक के दौरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ऊर्जा , बिजली और बंदरगाह परियोजनाओं जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रम सिंघे ने आज नये बांग्लादेशी क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पर चर्चा की। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रानिल विक्रमसिंघे ने समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया। इस दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर हुये। इनमें श्रीलंका में यूपीआई की स्वीकार करने के लिये नेटवर्क-टू-नेटवर्क समझौता भी शामिल है। जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उनके बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज हमने मछुआरों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। हम इस बात पर सहमत हैं कि हमें इस मामले पर मानवीय दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिये। हमने श्रीलंका में पुनर्निर्माण और सुलह के बारे में भी बात की। राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने मुझे अपने समावेशी दृष्टिकोण के बारे में बताया। हमें उम्मीद है कि श्रीलंका सरकार तमिलों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी और समानता , न्याय और शांति की प्रक्रिया को आगे बढ़ायेगी।दोनो देशों के बीच महत्वपूर्ण समसामयिक समझौता - पीएम मोदीमुलाकात के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुये पीएम मोदी ने कहा कि मैं राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और उनके प्रतिनिधिमंडल का भारत में स्वागत करता हूं। आज राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा किया है , इस पर मैं उन्हें शुभकामनायें देता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि पिछला एक वर्ष श्रीलंका के लोगों के लिये चुनौतियों से भरा रहा है। एक करीबी मित्र होने के नाते हमेशा की तरह हम इस संकट के काल में भी श्रीलंका के लोगों के साथ खड़े रहे और जिस साहस के साथ उन्होंने इस चुनौतियों का सामना किया मैं इसके लिये उनका अभिनंदन करता हूं। पीएम मोदी आगे कहा, हमारा मानना है कि भारत-श्रीलंका के सुरक्षा और विकास हित एक दूसरे से जुड़े हैं और इसलिये ये आवश्यक है कि हम एक दूसरे की सुरक्षा और संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुये साथ मिलकर काम करें। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान विजन डॉक्यूमेंट को अपनाया गया। पीएम मोदी ने कहा यह विजन दोनों देशों के लोगों के बीच समुद्री , वायु , ऊर्जा और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना और पर्यटन , बिजली , व्यापार , उच्च शिक्षा और कौशल विकास में आपसी सहयोग को तेज करना है। यह श्रीलंका के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का दृष्टिकोण भी बनाता है। वहीं दोनों देशों के रिश्तों पर बात करते हुये पीएम मोदी ने कहा - हमारे संबंध प्राचीन और व्यापक हैं। श्रीलंका और भारत के बीच हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाई जायेगी , पैसेंजर फेरी सर्विस शुरु होंगी और इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड पर भी काम होगा। मोदी ने कहा- हमें उम्मीद है कि श्रीलंका की सरकार तमिलों की आकांक्षाओं को पूरा करके समानता , न्याय और शांति के प्रोसेस को आगे बढ़ायेगी।भारत की मजबूती से क्षेत्रीय हितों की रक्षा - रानिल विक्रमसिंघेप्रेस कॉन्फ्रेंस में श्रीलंकाई राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे ने कहा पदभार ग्रहण करने के बाद यह मेरी भारत की पहली यात्रा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार विकास कर रहा है। आर्थिक बुनियादी ढांचे और तकनीक के क्षेत्र में भारत ने नई बुलंदियों को छुआ है , मैं इसके लिये उन्हें शुभकामनायें देता हूं। हमारा मानना है कि भारत की वृद्धि पड़ोस और हिंद महासागर क्षेत्र के लिये फायदेमंद होगी। भारत के दक्षिणी हिस्से से श्रीलंका तक मल्टी-प्रोजेक्ट पेट्रोलियम पाइपलाइन बनने से श्रीलंका में एनर्जी रिसोर्स की सप्लाई बेहतर होगी। पिछले एक साल में श्रीलंका ने कई आर्थिक , समाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया। मैंने इनसे निपटने के लिये कई मोर्चों पर अलग-अलग रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस किये। मैंने प्रधानमंत्री मोदी को श्रीलंका के सामने आने वाली चुनौतियों और हमारे द्वारा किये गये सुधारों से भी अवगत कराया है। मैंने उन्हें अर्थव्यवस्था में सुधार लाने की अपनी प्रतिबद्धता से भी अवगत कराया , जिससे सभी वर्गों को लाभ होगा। हमें अपनी अर्थव्यवस्था को विकास पथ पर ले जाने की जरूरत है। मैंने प्रधानमंत्री मोदी और भारत के लोगों को हमारे आधुनिक इतिहास में सबसे चुनौतीपूर्ण अवधि में श्रीलंका को प्रदान की गई एकजुटता और समर्थन के लिये गहरी सराहना व्यक्त की है। इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और बिजनेसमैन गौतम अडाणी से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों के बीच कोलंबो पोर्ट को लेकर चर्चा हुई। वहीं अपने भारत यात्रा के अंतिम चरण में श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और स्वदेश लौट गये। बताते चलें पिछले साल श्रीलंका में सिविल वॉर जैसे हालात बन गये थे और जनता ने राजपक्षे की सरकार को विद्रोह कर उखाड़ फेंका था। इसके बाद रानिल विक्रमसिंघे ने देश की कमान सम्हाली थी। दरअसल , रानिल सिर्फ गोटबाया राजपक्षे का बचा हुआ कार्यकाल पूरा करने तक ही राष्ट्रपति रहेंगे , उनका यह कार्यकाल सितंबर 2024 तक ही रहेगा।