Monday 2nd of November 2026

ब्रेकिंग

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया ‘‘सीएम हेल्पलाइन - 1076‘‘ का शुभारंभ

बालको ने किया मल्टी-स्पेशलिटी स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

बालको द्वारा आयोजित किसान मेला से कृषि नवाचार को मिला बढ़ावा

बालको द्वारा आयोजित किसान मेला से कृषि नवाचार को मिला बढ़ावा

बालको ने सुरक्षा को बनाया कार्य संस्कृति का आधार, ‘सुरक्षा संकल्प’ के 4 साल पूरे

सुचना

Welcome to the Samachar Bharti News, for Advertisement call +91-6261565687

: महिला सशक्तिकरण प्रयासों से महिलाओं में आशा और आत्मविश्वास होगा पैदा - पीएम मोदी

Mukesh Kumar Bharti

Thu, Aug 3, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट नई दिल्ली - महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण विकास को गति देता है और शिक्षा तक उनकी पहुंच वैश्विक प्रगति आगे बढ़ाती है। उन्हें सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी तरीका महिला नेतृत्व वाला विकास दृष्टिकोण है। भारत इस दिशा में प्रगति कर रहा है। उनकी आवाज सकारात्मक बदलाव के लिये प्रेरित करती है। अगर आप महिलाओं का विकास करना चाहते हैं तो आपको उनके नेतृत्व में ही विकास करना होगा। उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात की राजधानी गांधीनगर के महात्मा मंदिर में महिला सशक्तिकरण पर आयोजित जी -20 मंत्रिस्तरीय सम्मेलन को वर्चुअल संबोधित करते हुये कही। प्रधानमंत्री ने उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुये महात्मा गांधी के नाम पर रखे गये गांधीनगर शहर के स्थापना दिवस पर गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और प्रसन्नता व्यक्त की कि उन्हें अहमदाबाद में गांधी आश्रम का दौरा करने का अवसर प्राप्‍त हो रहा है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसे मुद्दों के लिये तत्काल और दीर्घकालीन समाधान खोजने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुये उन्होंने कहा कि गांधी आश्रम में गांधीजी की जीवन शैली की सादगी और स्थिरता , आत्मनिर्भरता और समानता के उनके दूरदर्शी विचारों को प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गणमान्य व्यक्तियों को इससे प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने दांडी कुटीर संग्रहालय का दौरा करने का भी उल्लेख किया और बताया कि गांधीजी का प्रसिद्ध चरखा पास के एक गांव में गंगाबेन नाम की एक महिला को मिला था। प्रधानमंत्री ने कहा कि तब से गांधीजी ने खादी पहनना शुरू कर दिया जो आत्मनिर्भरता और निर्वहनीयता का प्रतीक बन गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महिला सशक्तिकरण की आदर्श उदाहरण हैं। वे एक साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि से आती हैं , लेकिन अब दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करती हैं और दुनियां की दूसरी सबसे बड़ी सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्य करती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र  की इस जननी में 'मतदान का अधिकार' शुरू से ही भारतीय संविधान में महिलाओं सहित सभी नागरिकों को समान रूप से प्रदान किया गया था और समानता के आधार पर चुनाव लड़ने का अधिकार भी दिया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि आर्थिक , पर्यावरणीय और सामाजिक परिवर्तन की प्रमुख कारक रही हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत में ग्रामीण स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों में छियालीस प्रतिशत महिलायें हैं , जिनकी संख्या 1.4 मिलियन है। यह रेखांकित करते हुये कि स्व-सहायता समूहों में महिलाओं को प्रेरित करना भी बदलाव के लिये एक शक्तिशाली कारक रहा है। प्रधानमंत्री ने महामारी के दौरान हमारे समुदायों के लिये स्वयं सहायता समूहों और निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के सहायता के स्तंभ के रूप में उभरने पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने उनकी उपलब्धियों का उदाहरण दिया और मास्क और सैनिटाइजर के निर्माण और संक्रमण की रोकथाम के बारे में जागरूकता पैदा करने का उल्लेख किया। उन्‍होंने कहा - भारत में अस्सी प्रतिशत से अधिक नर्स और दाईयां महिलायें हैं। महामारी के दौरान वे हमारी रक्षा की अग्रिम पंक्ति थीं और हमें उनकी उपलब्धियों पर गर्व है। यह रेखांकित करते हुये कि महिला-केंद्रित विकास सरकार के लिये एक प्रमुख प्राथमिकता रही है , प्रधानमंत्री ने उल्‍लेख किया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत सूक्ष्म स्तर की इकाइयों की सहायता करने के लिये एक मिलियन रुपये तक के लगभग सत्तर प्रतिशत ऋण महिलाओं को मंजूर किये गये हैं। इसी तरह स्टैंड-अप इंडिया के तहत अस्सी प्रतिशत लाभार्थी महिलायें हैं , जो ग्रीन फील्ड परियोजनाओं के लिये बैंक ऋण का लाभ उठा रही हैं। यह देखते हुये कि स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन पर्यावरण को सीधे प्रभावित करता है और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाता है , पीएम ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर प्रकाश डाला और बताया कि ग्रामीण महिलाओं को लगभग 100 मिलियन रसोई गैस कनेक्शन प्रदान किये गये हैं। उन्होंने यह भी बताया कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की संख्या 2014 से दोगुनी हो गई है , भारत में एसटीईएम (विज्ञान , प्रौद्योगिकी , इंजीनियरिंग और गणित) स्नातकों में लगभग तिरालीस प्रतिशत महिलायें हैं और भारत में लगभग एक-चौथाई अंतरिक्ष वैज्ञानिक महिलायें हैं। उन्होंने कहा - चंद्रयान , गगनयान और मिशन मंगल जैसे हमारे प्रमुख कार्यक्रमों की सफलता के पीछे इन महिला वैज्ञानिकों की प्रतिभा और कड़ी मेहनत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में पुरुषों की तुलना में महिलायें उच्च शिक्षा में अधिक प्रवेश ले रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में नागरिक उड्डयन में महिला पायलटों का प्रतिशत सबसे अधिक है , जबकि भारतीय वायु सेना में महिला पायलट भी लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं। पीएम ने कहा कि हमारे सभी सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को प्रचालनगत भूमिकाओं और लड़ाकू मोर्चो पर तैनात किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीण कृषि परिवारों की रीढ़ के रूप में और छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के रूप में महिलाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिकाओं को रेखांकित किया। प्रकृति के साथ उनके घनिष्ठ संबंध को रेखांकित करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलायें जलवायु परिवर्तन के के नवोन्‍मेषी समाधानों की कुंजी हैं। उन्होंने स्‍मरण किया कि किस प्रकार महिलाओं ने अठारहवीं शताब्दी में भारत में पहली प्रमुख जलवायु कार्यवाही का नेतृत्व किया जब अमृता देवी के नेतृत्व में राजस्थान के बिश्नोई समुदाय ने अंधाधुंध कटाई को रोकने के लिये 'चिपको आंदोलन' शुरू किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने कई अन्य ग्रामीणों के साथ प्रकृति के ध्‍येय के लिये अपना जीवन अर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा - भारत में महिलायें ‘’मिशन लाईफ' - पर्यावरण के लिये जीवन शैली’’ की ब्रांड एंबेसडर भी रही हैं , साथ ही उन्होंने कम करने , पुन: उपयोग करनेक्ष, रिसाइकिल करने और पुन: प्रयोजन के उनके पारंपरिक ज्ञान को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विभिन्न पहलों के तहत महिलायें सक्रिय रूप से सौर पैनल और लाइट बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने 'सोलर मैमास' पहल का उल्लेख किया जो विकासशील देशों में साझेदार देशों के साथ सहयोग करने में सफल रही है। प्रधानमंत्री ने भारत में महिला उद्यमियों की भूमिका पर जोर देते हुये कहा कि महिला उद्यमियों का वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि दशकों पहले 1959 में मुंबई में सात गुजराती महिलाओं ने मिलकर एक ऐतिहासिक सहकारी आंदोलन श्री महिला गृह उद्योग का सृजन किया था , जिसने लाखों महिलाओं और उनके परिवारों के जीवन को रूपांतरित कर दिया है। पीएम ने उनके सबसे प्रसिद्ध उत्पाद लिज्जत पापड़ का उल्‍लेख‍ करते हुये कहा कि यह शायद गुजरात में खाद्य मेनू में शामिल होगा। उन्होंने डेयरी क्षेत्र का भी उदाहरण दिया और बताया कि अकेले गुजरात में इस क्षेत्र से 3.6 मिलियन महिलायें जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लगभग 15 प्रतिशत यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला संस्थापक है और महिलाओं के नेतृत्व वाली इन यूनिकॉर्न कंपनियों का संयुक्त मूल्य चालीस अरब डॉलर से अधिक है। प्रधानमंत्री ने एक ऐसा स्तरीय मंच का निर्माण करने की आवश्यकता पर बल दिया जहां उपलब्धियां हासिल करने वाली महिलायें आदर्श बन सकें। उन्होंने उन बाधाओं को दूर करने की दिशा में काम करने पर जोर दिया जो बाजारों , वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं और निम्‍न लागत वित्त तक उनकी पहुंच को प्रतिबंधित करते हैं , साथ ही यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि देखभाल और घरेलू काम के बोझ को भी इसी के साथ-साथ उपयुक्‍त तरीके से  दूर किया जाये। अपने संबोधन का समापन करते हुये प्रधानमंत्री ने महिलाओं की उद्यमिता , नेतृत्व और शिक्षा पर मंत्रालयी सम्मेलन के फोकस की सराहना की और महिलाओं के लिये डिजिटल और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिये 'टेक-इक्विटी प्लेटफॉर्म' के लॉन्‍च पर प्रसन्नता जताई की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत की जी-20 अध्यक्षता के तहत 'महिला सशक्तिकरण' पर एक नया कार्य समूह स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गांधीनगर में अथक प्रयासों से विश्व भर की महिलाओं में असीम आशा और आत्मविश्वास पैदा होगा।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें