Tuesday 3rd of November 2026

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राज्योत्सव की गरिमा सर्वोपरि—भारतीय जनाधिकार पार्टी ने 3 नवंबर का काला झंडा विरोध स्थगित किया 9 नवंबर के बाद केंद्रीय मं

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Mukesh Bharti : राज्योत्सव की गरिमा सर्वोपरि—भारतीय जनाधिकार पार्टी ने 3 नवंबर का काला झंडा विरोध स्थगित किया 9 नवंबर के बाद केंद्रीय मं

Mukesh Kumar Bharti

Tue, Nov 3, 2026

ACB ग्रुप एवं SECL की कथित अनियमितताओं और निजी मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों से कथित ₹500 करोड़ की अतिरिक्त फीस वसूली के मामलों में CBI जांच, संयुक्त SIT गठन एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग।

रायपुर:- भारतीय जनाधिकार पार्टी के अध्यक्ष-संयोजक दीपक दुबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि संगठन ने सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करने के बाद छत्तीसगढ़ राज्योत्सव की गरिमा, सम्मान एवं प्रदेश की प्रतिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 3 नवंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के रायपुर आगमन पर प्रस्तावित काला झंडा विरोध स्थगित करने का निर्णय लिया है। संगठन का यह निर्णय प्रदेश के सम्मान के प्रति अपनी जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, इस निर्णय को सरकार के प्रति आंदोलन की वापसी या शिकायतों से पीछे हटना नहीं समझा जाए।

काला झंडा विरोध स्थगित हुआ है, जनहित की लड़ाई नहीं।

दीपक दुबे ने स्पष्ट कहा कि 9 नवंबर 2026 के बाद छत्तीसगढ़ प्रवास पर आने वाले किसी भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष संगठन अपनी लंबित शिकायतों और जनहित के मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगा। संगठन का उद्देश्य केंद्र एवं राज्य सरकार का ध्यान उन गंभीर मामलों की ओर आकर्षित करना है जिन पर लंबे समय से शिकायतें और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई एवं स्पष्ट जवाबदेही सामने नहीं आई है।

श्री दीपक दुबे ने कहा कि ACB ग्रुप एवं SECL से संबंधित मामलों में कोलवाशरियों की वास्तविक उत्पादन क्षमता, कोयला आवंटन एवं उपयोग, Raw Coal और Reject Coal का हिसाब, Material Balance, Washery Reject/Middlings का उपयोग एवं परिवहन, रेलवे साइडिंग, Weighbridge Reconciliation, रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांटों की Fuel Accounting, विद्युत उत्पादन, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और संबंधित वित्तीय एवं नियामकीय अभिलेखों की स्थापना काल से वर्तमान तक स्वतंत्र जांच आवश्यक है। संगठन ने इन मामलों में अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, CBI जांच, संयुक्त विशेष जांच दल (SIT) गठन तथा व्यापक बहु-विभागीय फोरेंसिक ऑडिट की मांग लगातार उठाई है। जांच में कोयला हेराफेरी, राजस्व हानि, पर्यावरणीय उल्लंघन अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों की मिलीभगत है, तो उनके विरुद्ध FIR, संपत्ति जब्ती एवं कठोर वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं से निर्धारित फीस से अतिरिक्त लगभग ₹500 करोड़ की वसूली, सरकारी फीस-वापसी आदेशों के अनुपालन में संभावित विफलता, विद्यार्थियों के लंबित रिफंड, MBBS में EWS/NRI श्रेणी के प्रवेश, कथित फर्जी फैकल्टी, मरीजों एवं शिक्षण अस्पतालों के अभिलेखों तथा निरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवालों को मई 2025 से लगातार शासन-प्रशासन के समक्ष उठाया जा रहा है। इसके बावजूद कॉलेजवार वास्तविक वसूली, विद्यार्थियों को लौटाई गई राशि, लंबित रिफंड और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई का स्पष्ट एवं प्रमाणित विवरण सामने आना आवश्यक है। संगठन की मांग है कि ₹500 करोड़ की राशि का कॉलेजवार वित्तीय एवं दस्तावेजी सत्यापन कराया जाए तथा प्रवेश, फैकल्टी, अस्पताल और निरीक्षण संबंधी अभिलेखों की स्वतंत्र जांच हो। स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही का भी निष्पक्ष परीक्षण किया जाए। गंभीर प्रशासनिक लापरवाही, जानबूझकर निष्क्रियता अथवा अनुचित संरक्षण पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई, पद से हटाने तथा कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई की जाए। प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपराध पर FIR दर्ज कर ACB/EOW एवं CBI जांच कराई जाए।

दीपक दुबे ने कहा कि इन दोनों मामलों को अलग-अलग विभागों की सामान्य शिकायत मानकर फाइलों में दबाए रखना जनहित के साथ न्याय नहीं होगा। एक ओर प्राकृतिक संसाधनों, कोयला एवं सार्वजनिक राजस्व से जुड़े गंभीर सवाल हैं, तो दूसरी ओर मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य, अभिभावकों की आर्थिक स्थिति और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता का प्रश्न है। इसलिए संगठन की मांग है कि दोनों प्रकरणों में उपलब्ध शिकायतों, दस्तावेजों और साक्ष्यों का स्वतंत्र परीक्षण कर सक्षम एजेंसियों से CBI जांच एवं संयुक्त SIT गठन पर निर्णय लिया जाए और जांच की समयसीमा तथा कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए।

उन्होंने शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इन शिकायतों पर केवल आश्वासन, पत्राचार और औपचारिक जांच के नाम पर समय बिताया गया तथा वास्तविक कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन अपने पूर्व घोषित चरणबद्ध आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा। 18 नवंबर 2026 से SECL मुख्यालय, बिलासपुर में अनिश्चितकालीन धरना तथा 30 नवंबर 2026 से केंद्रीय कोयला मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी के हैदराबाद स्थित आवास के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना आयोजित करने की घोषणा यथावत है।

श्री दीपक दुबे ने कहा कि भारतीय जनाधिकार पार्टी का संघर्ष सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा, विद्यार्थियों के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शी प्रशासन और कानून के शासन की स्थापना के लिए है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि गंभीर शिकायतों पर कार्रवाई कब होगी, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा और प्रभावित विद्यार्थियों एवं आम जनता को न्याय कब मिलेगा।

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