: बालको ने विश्व पर्यावरण दिवस पर चलाया पर्यावरण संरक्षण अभियान
Wed, Jun 7, 2023
# वित्तीय 2024 में 1 लाख पेड़ लगाने का संकल्प
# बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन अभियान को बढ़ावा देने के लिए 10,000 कपड़े के थैले वितरित किए
# संयंत्र परिसर में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को दिया बढ़ावा
बालकोनगर, 7 जून 2023। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जिम्मेदार कॉर्पोरेट संस्थान के रूप में बालको पर्यावरणीय स्थिरता के महत्व को ध्यान में रखकर आसपास के क्षेत्र में अपने प्रयासों से सार्थक बदलाव लाया है। कंपनी का वृक्षारोपण अभियान हरित भविष्य को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। 100 पौधे लगाये गए तथा साल भर में एक लाख से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया गया है। ग्रीन हर्ट अभियान वेदांता एल्यूमिनियम व्यवसाय की पहल है जो देश भर के लोगों को साथ मिलकर बेहतर और हरित भविष्य के लिए पौधा लगाने के लिए प्रेरित करता है।
केंद्र सरकार की पहल 'लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट' और बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन के अनुरूप बालको ने सिंगल-यूज प्लास्टिक के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया। कंपनी ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड (सीईसीबी) के सहयोग से रायपुर में समुदाय के सदस्यों और स्कूली बच्चों को 10,000 कपड़े के बैग वितरित किए। बालको और सीईसीबी द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय वॉकथॉन में 500 से अधिक स्कूली बच्चों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को पर्यावरण के अनुकूल उपहारों से पुरस्कृत किया गया जिसमें पुनर्नवीनीकरण और बीज युक्त कागज से बना एक कैलेंडर साथ ही बालको सीएसआर कार्यक्रम के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाई गई नमकीन शामिल हैं। इनका उद्देश्य स्थायी विकल्पों को बढ़ावा देना और प्लास्टिक कचरे को कम करने के महत्व पर जोर देना है।
साथ ही बालको ने अपने संयंत्र परिसर के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवीएस) को सफलतापूर्वक पेश करके पर्यावरण अनुकूल परिवहन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। इसे अपनाकर बालको ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि हम अपने पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने और संरक्षित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं। तकनीक और नवीन सोच को अपनाकर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी और हरित भविष्य बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। प्लास्टिक कचरे को कम करने के संदेश को फैलाने में समुदाय, विशेष रूप से स्कूली बच्चों की उत्साही भागीदारी हमें कृतज्ञता से भर देती है। साथ में हम स्थायी दिशा में पर्यावरण के अनुकूल भविष्य का रास्ता बना सकते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए हमारी अटूट प्रतिबद्धता हमारी दृष्टि, कॉर्पोरेट उद्देश्यों, उत्पादन प्रक्रियाओं और व्यवसाय के संचालन में अंतर्निहित है। हम अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं और पर्यावरण को संरक्षित और संरक्षित करने वाली कार्रवाइयों को जारी रखेंगे
आर पी तिवारी, सदस्य सचिव छ.ग., पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कहा कि बालको एक जिम्मेदार संगठन है और यह पर्यावरण की सुरक्षा के लिए लगातार महत्वपूर्ण तथा सार्थक कदम उठा रहा है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न औद्योगिक संगठन के साथ-साथ बालको पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नवाचार कदम से अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित कर रहा है। पर्यावरण संरक्षण में बालको के विभिन्न पहल, संयंत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक को कम करना और पौधा रोपण पहल से वास्तव में प्रभावित हूं।
कंपनी ने कार्यक्रम की थीम के अनुरूप एक सप्ताह भर चलने वाले अभियान की योजना बनाई है। इसमें कर्मचारियों और स्थानीय समुदाय को शामिल करते हुए स्वच्छता अभियान, जागरूकता रैली, उद्योग विशेषज्ञों की वार्ता (बालको टॉक्स), संयंत्र परिसर के भीतर पर्यावरण वृत्तचित्रों की स्क्रीनिंग और कर्मचारियों के बीच कारपूलिंग को बढ़ावा देने जैसी कार्य शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना और बालको के हितधारकों के बीच स्थायी प्रथाओं को प्रोत्साहित करना है
ज़ीरो हार्म, ज़ीरो वेस्ट, और ज़ीरो डिस्चार्ज के अपने दृष्टिकोण के साथ बालको ने अपने संयंत्र के आसपास अब तक लगभग 30 लाख पौधे लगाए हैं। कंपनी अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए हरित विकल्प का उपयोग कर रही है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपने उत्कृष्ट प्रयासों के लिए कंपनी को फ्रॉस्ट एंड सुलिवन द्वारा 'सस्टेनेबल फैक्ट्री ऑफ द ईयर', सीआईआई ग्रीन कंपनी रेटिंग सिस्टम में 'ग्रीनको सिल्वर' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
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: एक दिन के उद्घोषित कलेक्टर शैलेन्द्र ध्रुव का निधन
Wed, Jun 7, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टगरियाबंद - लाईलाज बीमारी प्रोजेरिया से ग्रसित एवं एक दिन के उद्घोषित कलेक्टर शैलेंद्र ध्रुव का देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने से आकस्मिक निधन हो गया। इस खबर के बाद परिजनों समेत आसपास के क्षेत्रो में शोक की लहर दौड़ गई। छत्तीसगढ़ सरकार ने उनको एक दिन का कलेक्टर बनाकर उनकी इच्छा पूरी की थी। उनके निधन पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शोक जताया है।
गौरतलब है कि शैलेन्द्र ध्रुव गरियाबंद जिले के छुरा के ग्राम मेडकी डबरी के निवासी थे। वे लाईलाज प्रोजेरिया बीमारी से ग्रसित थे। इस बीमारी के कारण बचपन में ही उनका शरीर बुजुर्गों जैसा हो गया था। इस बीमारी के कारण व्यक्ति का शारीरिक विकास रूक जाता है और छोटी उम्र में ही बूढ़े की तरह दिखने लगते हैं। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने प्रोजेरिया से पीड़ित बच्चे की कहानी पर्दे पर उतारी थी और इस फिल्म के लिये अमिताब बच्चन के काम को काफी सराहा गया था। पा नाम से आई इस फिल्म के बाद शैलेन्द्र ध्रुव भी चर्चा में आये थे। उनसे जब पूछा गया कि उनका सपना क्या है तो उन्होंने बताया था कि उनको कलेक्टर बनना है। इसके बाद उनके इस सपने को पूरा करते हुये राज्य शासन ने दो साल पहले 23 अक्टूबर 2021 को उन्हें 16 वर्ष की उम्र में एक दिन का कलेक्टर बनाया था। डिप्टी कलेक्टर रुचि शर्मा उनको लेने उसके घर लेने पहुंची थी। वहीं कलेक्टर निलेश क्षीर सागर सारे प्रोटोकॉल का पालन किया। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कलेक्टर एसपी कान्फ्रेंस में शैलेंद्र ध्रुव को अपने बगल में बैठाया और सारे उच्च अधियाकारियो से उसकी मुलाकात भी कराई थी। इतना ही नहीं सीएम भूपेश बघेल ने उन्हें अपने निवास में आमंत्रित कर उनके साथ भोजन भी किया था। सोमवार की देर रात शैलेन्द्र के सीने में तेज दर्द हुआ , जिसके बाद रसेला के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।सीएम ने जताया शोकमुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आज सुबह जैसे ही शैलेंद्र के निधन की सूचना मिली उन्होंने ट्वीट कर शोक जताया। सीएम बघेल ने लिखा कि शैलेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। वो प्रोजेरिया बीमारी से ग्रसित थे। हमने उसकी एक दिन का कलेक्टर बनने की इच्छा तो पूरी कर दी थी लेकिन ईश्वर की कुछ और इच्छा थी। भगवान उसका ख्याल रखें , घर वालों को हिम्मत मिले। ओम् शांतिः।
: सीएम बघेल ने की गोधन न्याय योजना हितग्राहियों को राशि अंतरित
Mon, Jun 5, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में जैविक खाद और जैविक कीटनाशक महिला समूहों द्वारा तैयार किये जा रहे हैं। गौठानों में ये उत्पाद भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। इनके उपयोग से जमीन की उर्वरता बढ़ेगी और खेती की लागत भी कम होगी।
उक्त बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज किसानों से आगामी खरीफ सीजन में खेती किसानी में जैविक खाद और जैविक कीटनाशक का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने की अपील करते हुये कही। वे आज अपने राजधानी स्थित निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को राशि के आनलाइन अंतरण के लिये आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में गोधन योजना के हितग्राहियों के खाते में ऑनलाईन 21.31 करोड़ रूपये की राशि अंतरित की। इस राशि में 16 मई से 31 मई तक गौठानों में क्रय किये गये गोबर के एवज में ग्रामीण पशुपालकों 04.91 करोड़ रूपये तथा गौठान समितियों को 08.98 करोड़ एवं स्व-सहायता समूहों को 06.29 करोड़ रूपये की लाभांश राशि तथा गौठान समितियों ने अध्यक्षों और सदस्यों के मानदेय की 01.13 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। गौरतलब है कि गोबर विक्रेताओं , गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को आज वितरित की गई राशि को मिलाकर अब तक हितग्राहियों को 538 करोड़ 89 लाख रूपये का भुगतान किया जा चुका है। इसमें से योजना के प्रारंभ होने के बाद से अब तक गोबर विक्रेताओं को 237.28 करोड़ रूपये तथा स्व- सहायता समूहों एवं गौठान समितियों को 223.60 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में स्वावलंबी गौठान समिति के अध्यक्षों और सदस्यों को मिलाकर समिति के कुल 21 हजार 360 सदस्यों की मानदेय की 01.13 करोड़ रुपये की राशि जारी की। स्वावलंबी गौठान समिति के अध्यक्ष को 750 रुपये और अशासकीय सदस्यों को 500 रुपये का मानदेय दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश में 10 हजार 409 गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है , इनमें से 98 प्रतिशत यानि 10 हजार 235 गौठानों का निर्माण पूरा हो गया है। जबकि 04 हजार 584 गौठान ऐसे हैं , जिन्होंने पिछले 15 दिनों में 30 क्विंटल या उससे अधिक गोबर की खरीदी की है। इससे पूर्व के पखवाड़े की तुलना में इतनी अधिक मात्रा में गोबर खरीदने वाले गौठानों की संख्या में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार पिछले वर्ष 16 से 31 मई 2022 की तुलना में इस वर्ष इसी अवधि में गोबर खरीदी में 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रदेश के 05 हजार 911 गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं। इन गौठानों द्वारा अब तक गोबर खरीदी के एवज में कुल 53 करोड़ 80 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। आज गोबर खरीदी के एवज में जारी की गई 04 करोड़ 91 लाख रुपये की राशि में से 03 करोड़ 05 लाख रुपये का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा तथा विभाग द्वारा 01 करोड़ 86 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में चल रही विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से 15 हजार 905 स्व सहायता समूहों की 01 लाख 89 हजार 614 सदस्यों को अब तक 144 करोड़ 22 लाख रुपये की आय हुई है। बताते चलें सीएम बघेल ने इस अवसर पर अपने निवास परिसर में आंवला का पौधा लगाया। उन्होंने प्रदेशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की बधाई देते हुये कहा आज विश्व पर्यावरण दिवस है। हमारी गोधन न्याय योजना का एक उद्देश्य पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन करना भी है। राज्य सरकार द्वारा सुराजी गांव योजना , मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना , वृक्ष संपदा योजना , कृष्ण कुंज योजना , नदी तट वृक्षारोपण , फलदार पौधा रोपण जैसी योजनाओं के माध्यम से अपने पर्यावरण को लगातर बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है। हमारी सरकार पर्यावरण के संरक्षण के लिये हर संभव प्रयास कर रही है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील किया कि आने वाले मानसून में ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करें और अपने गांव , गौठान , खेतों और जंगलों को खूब हरा-भरा बनायें। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा , अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू , कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ कमलप्रीत सिंह , नरवा - गरूवा - घुरवा - बाड़ी योजना के नोडल अधिकारी डॉ० अयाज तंबोली , संचालक कृषि श्रीमती रानू साहू भी विशेष रूप से उपस्थित थीं।